मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और उच्च मूल्यांकन के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों के निवेश रुझान में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जुलाई माह के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड में होने वाले कुल निवेश में आंशिक कमी दर्ज की गई है, वहीं स्मॉलकैप श्रेणियों में निवेशकों का भारी उत्साह बना हुआ है। इसके साथ ही एसआईपी के माध्यम से निवेश का सिलसिला लगातार मजबूत स्थिति में है।

लार्जकैप फंडों से निकासी और स्मॉलकैप में रिकॉर्ड निवेश

समीक्षाधीन अवधि में निवेशकों का रुख पारंपरिक लार्जकैप फंडों से हटता हुआ नजर आया है, जिसके चलते इस श्रेणी से शुद्ध निकासी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ समय में लार्जकैप शेयरों के मुकाबले अन्य विकल्पों से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद और ऊंचे बाजार स्तर के कारण निवेशकों ने यह कदम उठाया है। इसके विपरीत, स्मॉलकैप फंडों ने निवेशकों को सबसे अधिक आकर्षित किया और इस श्रेणी में अब तक का सबसे बड़ा मासिक शुद्ध निवेश आया है। इसके अलावा मिडकैप, फ्लेक्सीकैप और मल्टीकैप जैसी अन्य इक्विटी श्रेणियों में भी निवेशकों ने अच्छी खासी पूंजी लगाई है, जिससे स्पष्ट होता है कि निवेशक अधिक जोखिम लेकर भी बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं।

एसआईपी पर अटूट भरोसा और डेट फंडों में भारी पूंजी प्रवाह

शेयर बाजार के ऊंचे स्तरों के प्रति सावधानी बरतने के बावजूद म्यूचुअल फंड निवेशकों का सि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी पर भरोसा पूरी तरह कायम है। जुलाई महीने के दौरान एसआईपी के जरिए होने वाला निवेश रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है, जो लगातार कई महीनों से मजबूत बना हुआ है। इसके साथ ही डेट और लिक्विड फंड्स में भी भारी मात्रा में पूंजी का प्रवाह देखा गया है। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि निवेशक बाजार से पूरी तरह दूरी बनाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और नफा-नुकसान के आकलन के आधार पर अपनी परिसंपत्तियों का पुनर्गठन कर रहे हैं।